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घाटकोपर में श्री नारायण भक्ति सत्संग

स्वामी श्री लोकेशानंद महाराज जी के दिव्य वचनों से गुंजा परिसर

घाटकोपर(स भा): घाटकोपर स्थित पाटीदार वाडी में आयोजित दो दिवसीय श्री नारायण भक्ति सत्संग एवं महाप्रसाद का शुभारंभ श्री नारायण भक्ति पंथ के प्रवर्तक परमपूज्य स्वामी श्री लोकेशानंद महाराज जी के दिव्य वचनों के साथ हुआ।

पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों की उपस्थिति से संपूर्ण वातावरण भक्ति रस में सराबोर हो गया। आरती, भजन और सत्संग के मधुर स्वर में भक्तगण मंत्रमुग्ध हो उठे।

इस आयोजन के प्रमुख संयोजक अनिल गलगली और हितेश विजय शेट्टी रहे, जिन्होंने अपनी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ भक्ति महोत्सव का आयोजन किया।

स्वामी श्री लोकेशानंद महाराज जी ने अपने प्रवचन में कहा कि “श्री नारायण भक्ति पंथ का मूल आधार प्रेम, सेवा और सत्य है। जब मनुष्य अपने जीवन में ईश्वर के प्रति भक्ति और मानवता के प्रति सेवा भाव रखता है, तभी जीवन धन्य बनता है।” उन्होंने बताया कि नारायण तत्व का अर्थ केवल पूजा या उपासना तक सीमित नहीं है, बल्कि वह जीवन के हर क्षण में ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव करना है।

लोकेशानंद महाराज जी ने भक्तों को यह संदेश दिया कि भक्ति केवल मंदिरों तक सीमित नहीं, बल्कि हर कार्य, हर संबंध में ईश्वर भाव लाना ही सच्ची साधना है।

कार्यक्रम स्थल पर दीप प्रज्वलन और मंत्रोच्चार के बीच वातावरण दिव्यता से ओत-प्रोत हो उठा। भक्ति गीतों और कीर्तन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कराई।

इस अवसर पर प्रमुख अतिथि के रूप में भूतपूर्व सांसद पूनम ताई महाजन, पूर्व मंत्री मोहम्मद आरिफ (नसीम) खान, श्री सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी, मुंबई भाजपा प्रवक्ता उदय प्रताप सिंह, पूर्व नगरसेवक भालचंद्र शिरसाट, आशिष तिवारी, समाजसेवी गणपत कोठारी, मनसे नेते दशरथ शिर्के, विजय शेट्टी, पोलीस अधिकारी बलवंत देशमुख, संदीप शुक्ला, मनसे नेता दशरथ शिर्के, विजय शेट्टी, वरिष्ठ पत्रकार आदित्य दुबे, राजेश विक्रांत, अभय मिश्रा, श्रीश उपाध्याय, प्राची अग्रवाल, हार्दिक खत्री, नितीन अग्रवाल, मनीष शर्मा, युवराज अग्रवाल, डॉ. दीप नारायण शुक्ला, प्रभाकर शुक्ला, आदेश मिश्रा, रवी पूंज और वकील यादव उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने स्वामी श्री लोकेशानंद महाराज जी से आशीर्वाद प्राप्त किया और समाज में आध्यात्मिकता के प्रसार के लिए उनके प्रयासों की सराहना की।

कार्यक्रम के अंत में सामूहिक महाआरती और महाप्रसाद का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों भक्तों ने भाग लेकर भक्ति और प्रसाद का लाभ प्राप्त किया।

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