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स्टॉल लाइसेंस घोटाले में नप गया एमबीएमसी इंजीनियर

पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ एफआईआर

भायंदर (सं. भा.) मीरा – भायंदर मनपा क्षेत्र में हुए स्टॉल लाइसैंस घोटाला प्रकरण में आखिरकर दोषी इंजीनियर शैलेश शिंदे नप गया। शिंदे के खिलाफ भायंदर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इस प्रकरण में शिंदे को निलंबित किया गया था, लेकिन कई सामाजिक संस्थाओं के साथ – साथ दिव्यांगों के लिए कार्य करने वाली भावना फाउंडेशन की अध्यक्षा भावना तिवाड़ी ने दोषी इंजीनियर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। अन्यथा आमरण आंदोलन की लिखित चेतावनी मनपा आयुक्त संजय श्रीपतराव काटकर और पुलिस आयुक्त मधुकर पांडे को दी थी। इसके बाद मनपा आयुक्त काटकर के आदेश पर मनपा के संपत्ति (मालमत्ता) व्यवस्थापन विभाग में कार्यरत कनिष्ठ लिपिक योगेश लडकु घरत की शिकायत पर भायंदर पुलिस ने शिंदे के खिलाफ जालसाजी के विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। घरत द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में कहा गया है कि शैलेश शिंदे वर्ष 2022 से मनपा के संपत्ति व्यवस्थापन विभाग में कार्यरत है।

मनपा क्षेत्र में फास्ट फुड जूस सेंटर तथा अन्य स्टॉल के लिए इस विभाग द्वारा अनुमति दी जा रही है। इस विभाग के कुछ रजिस्टर व फाइल की जांच करने पर 2024 में पता चला कि मनपा की कोई भी अनुमति नहीं लेने अथवा इस विभाग की कोई भी अनुमति नहीं होते हुए भी भूमि किराया (भुई भाड़ा) वसूल की गई। साथ ही उक्त फाइल में कार्यकारी अभियंता दीपक खांबित और उप अभियंता चेतन म्हात्रे के हस्ताक्षर के कागजात मिले। जिसे दिखाने पर उनके नकली हस्ताक्षर होने की पुष्टि हुई। साथ ही सुनील नामदेव अहिरे, सिंधुताई भदाने, रोशन शंकर पटेल, विशाल तुकाराम राऊत आदि 14 स्टाल धारकों को बोगस भूमि भाड़ा लगाए जाने की सूची भी सामने आई। इसके अलावा किरण बारीकराव कोलेकर, ललिता सोनिग्रा, कबीर चौरसिया आदि ने भी मनपा से शिकायत किया था की शिंदे ने आरे स्टॉल की अनुमति के लिए उनसे 1.50लाख रुपए की जालसाजी की है।

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