जौनपुर (सं. भा.) : किसान अब रबी की प्रमुख फसल गेहूं की खेती की बजाय सरसों, मसूर, चना, मटर आदि की तरफ रुख कर रहे हैं। सुईथाकला विकास खंड में गतवर्ष से इन फसलों का बढ़ा हुआ क्षेत्रफल यही सच्चाई बयां कर रहा है। इसके पीछे गेहूं की खेती में बढ़ती लागत व घटती पैदावार के साथ ही कई अन्य वजहें भी उत्तरदायी हैं।
विकास खंड क्षेत्र में बड़े भू-भाग पर दशकों से गेहूं, धान के अलावा मुख्य रूप से गन्ने की खेती ही प्रचलन में रही है। इसमें शाहगंज चीनी मिल बंद होने के बाद साल दर साल गन्ने का भी रकबा सिकुड़ता चला गया। एक तरह से गेहूं, धान ही मुख्य फसल रह गई। समय के साथ इसके दुष्परिणाम भी किसानों की समझ में आने लगे। आज हालात यह है कि कितनी भी कोशिश कर ली जाए प्रति बीघे आठ से दस कुंतल के ऊपर गेहूं की पैदावार जा ही नहीं पा रही है। इसी तरह धान की भी हालत वही है। किसानों के अनुसार दोनों ही फसलों में जोताई, बीज, खाद, सिचाई, मड़ाई तथा मजदूरी आदि जोड़ ली जाए तो लागत-मुनाफा सब बराबर हो जाता है। दूसरी बड़ी समस्या इन फसलों को बेचने की है। गेहूं में तो उतनी समस्या नहीं होती, लेकिन धान को तो कोई पूछने वाला नहीं मिलता है। सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी से पांच सौ रुपये सस्ते में खुलेआम किसानों से आढ़ती खरीद लेते हैं। रबी की बोआई तथा शादी-ब्याह के खर्चो से परेशान किसान को खुद ही औने-पौने दामों में बेचने की जल्दी रहती है। गतवर्ष सरसों की भारी पैदावार और बाजार में अच्छा मूल्य किसानों को इन फसलों की तरफ आकर्षित कर रहा है। जिसके चलते कटघर, रामनगर, सारी जहांगीरपट्टी, जैनपुर, रुधौली, कम्मरपुर, सुकर्णाकला, पिपरौल, ऊंचगांव, दुमदुमा, सुइथाकलां, अमावां कलां, चौबाहां समेत दर्जनों गावों में किसान सरसों, मसूर, मदर आदि फसलों का रकबा बढ़ाकर किसान गेहूं की बोआई कम कर दिए हैं।
लक्ष्य से 25 फीसद बढ़ गया रकबा.. जिले में इस साल तिलहनी-दलहनी फसलों के लिए जो क्षेत्रफल निर्धारित किया गया था उससे 25 फीसद ज्यादा रकबे में खेती हुई है। बीते साल की अपेक्षा इस साल 35 फीसद ज्यादा क्षेत्रफल में इस फसल की खेती हुई है।


