मुंबई (सं. भा.) राज्य में डॉक्टरों की कमी के बावजूद पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री और चिकित्सा शिक्षा विभाग के पूर्व सचिव ने कुछ महीने पहले जल्दबाजी में 396 डॉक्टरों के ट्रांसफर कर दिए थे। इनमें से 205 ने सेवा ज्वाइन नहीं की। इससे अस्पतालों में मरीजों की देखभाल पर बुरा असर पड़ा है। सरकार का प्रयास है कि राज्य के हर जिले में एक सरकारी मेडिकल कॉलेज खोला जाए। इस समय राज्य में 25 जिलों में सरकारी मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किए गए हैं।
जल्दबाजी में किए गए तबादले मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की अपर्याप्त संख्या के कारण मरीजों की देखभाल करने में कठिनाइयां आ रही हैं, इससे सरकारी अस्पतालों में मरीजों का बुरा हाल हो गया है। यदि शीघ्र इसका समाधान नहीं निकाला गया तो नांदेड़ और छत्रपति संभाजी नगर जैसी घटनाओं के होने में देर नहीं लगेगी। सरकार का प्रयास है कि राज्य के हर जिले में एक सरकारी मेडिकल कॉलेज खोला जाये। वर्तमान में प्रदेश में 25 जिलों में सरकारी मेडिकल कॉलेज शुरू किए गए हैं।

फैसले पर लगा दी गई रोक
असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर की काफी कमी महसूस की जा रही है। इनमें से अधिकांश मेडिकल कॉलेज अभी भी पूर्ण रूप से शुरू नहीं हुए हैं। इसके बावजूद पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने बिना सोचे-समझे राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में 396 डॉक्टरों का जल्दबाजी में तबादला कर दिया। इन तबादलों में 177 असिस्टेंट प्रोफेसर, 131 एसोसिएट प्रोफेसर और 88 प्रोफेसर शामिल हैं। कई डॉक्टरों ने यह कहते हुए मैट का दरवाजा खटखटाया कि यह स्थानांतरण वैध नहीं है और फैसले पर रोक लगा दी गई।


