प्रमोद कुमार
जौनपुर (सं.भा.): जौनपुर ज़िले के सुजानगंज ब्लॉक अंतर्गत वार्ड नंबर 32 से ज़िला पंचायत सदस्य पद के प्रत्याशी अशोक तिवारी ने क्षेत्र की बदहाल स्थिति को लेकर कहा कि सुजानगंज की सड़कें जर्जर हैं, कई गांवों में आज भी एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाती। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में न डॉक्टर हैं, न दवाइयाँ। किसानों की हालत आवारा पशुओं के कारण खेती घाटे का सौदा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि बेरोज़गारी और पलायन आज सुजानगंज की सबसे बड़ी त्रासदी है। “यहां का युवा रोज़गार की तलाश में दिल्ली, मुंबई और सूरत जैसे शहरों में पलायन कर रहा है। गांवों में माता-पिता अकेले और असुरक्षित जीवन जी रहे हैं। यह प्रशासनिक नहीं, बल्कि मानवीय विफलता है. जीत के बाद पलायन रोकना मेरी पहली प्राथमिकता अशोक तिवारी ने कहा कि यदि जनता ने उन्हें ज़िला पंचायत सदस्य चुना, तो वे स्थानीय रोज़गार सृजन को मिशन के रूप में लेंगे। “कुटीर उद्योग, कृषि आधारित उद्योग, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, डेयरी, मधुमक्खी पालन और स्वरोज़गार केंद्र स्थापित कराने के लिए ज़िला प्रशासन और सरकार पर लगातार दबाव बनाऊंगा। गांव में रोज़गार होगा, तभी पलायन रुकेगा,” उन्होंने कहा।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस सरकारी योजना आधारित पहल अशोक तिवारी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण उनकी विकास नीति का मूल आधार होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं को सिर्फ़ भाषण नहीं, सरकारी योजनाओं के माध्यम से ट्रेनिंग और फंड दिलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि महिलाओं को— राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत स्वयं सहायता समूह (SHG) से जोड़ा जाएगा दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (DDU-GKY) के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण दिलाया जाएगा सिलाई-कढ़ाई, बुनाई, हस्तशिल्प, अगरबत्ती निर्माण, मसाला व पापड़-बड़ी निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण जैसे लघु उद्योगों की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जाएगी प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराने के लिए बैंक स्तर पर पैरवी की जाएगी स्टैंड-अप इंडिया और मुख्यमंत्री स्वरोज़गार योजना के माध्यम से पूंजी सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा “महिलाओं को ट्रेनिंग के बाद अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। उन्हें बाज़ार से जोड़ने, उत्पाद की बिक्री और आर्थिक स्थायित्व तक हर स्तर पर सहयोग किया जाएगा, ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें,” — तिवारी ने कहा।
आवारा पशु किसानों के लिए अभिशाप, होगा स्थायी समाधान अशोक तिवारी ने गांवों में बढ़ती आवारा पशुओं की समस्या को किसानों की कमर तोड़ने वाला बताया। “गौशालाओं को काग़ज़ से बाहर लाकर ज़मीन पर सक्रिय किया जाएगा। पंचायत स्तर पर पशु संरक्षण समिति, नियमित निगरानी और बजट के सही उपयोग से किसानों को राहत दिलाई जाएगी। यह मुद्दा अब टालने वाला नहीं है,” उन्होंने कहा। शिक्षा, अनुभव और संघर्ष की पृष्ठभूमि अशोक तिवारी की शैक्षणिक योग्यता बी कॉम, CA इंटर और LLB है। वे लगभग 20 वर्षों तक सक्रिय पत्रकार रहे हैं और वर्तमान में बॉम्बे हाईकोर्ट में अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस कर रहे हैं। “सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, किसान, महिला और युवा—हर मुद्दे पर मैं सड़क से सदन तक संघर्ष करूंगा। सुजानगंज को अब भाषण नहीं, ईमानदार और जमीनी नेतृत्व चाहिए,” उन्होंने कहा।


