विनय दूबे/भाईंदर
पालघर (सं.भा.) प्रकृति के निर्दोष वारिसों का कत्ल कर पर्यावरण के नियमों की धज्जियाँ उडाने वालों को कब मिलेगी सजा यही सवाल शुक्रवार को मीरा-भाईंदर शहर के नागरिकों, पर्यावरणविदों और छात्र-कार्यकर्ताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने एमबीवीवी पुलिस आयुक्तालय के बाहर नारे लगाते हुए किया। हाथों में चेतावनी भरे बैनर‑पोस्टर लिए शहर के स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि शहर में दर्ज सैकड़ों पर्यावरण मामलों की जांचें नौकरशाही के संरक्षण में पली‑बढ़ीं और दोषियों को बचाने के लिए मामूली, त्रुटिपूर्ण कार्रवाई बार‑बार दोहराई जा रही है।
प्रदर्शनकारियों के शिष्टमण्डल ने एमबीवीवी पुलिस आयुक्त निकेत कौशिक को ज्ञापन सौंप कर कड़ी कार्यवाई करने की मांग की।
पर्यावरण प्रेमियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि पर्यावरण के दोषियों के खिलाफ 2005 से 2026 के बीच 200 से अधिक मामले दर्ज होने के बावजूद सजा का अनुपात नगण्य है; परिणाम — पर्यावरणीय अपराधियों में कानून का भय समाप्त होने के कारण विकास के नाम पर प्रकृति के बेज़ुबान वारिसों बेरहमी से कत्ल किया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों की 5 मांगें स्पष्ट और कड़वी हैं:
2005–2026 के बीच दर्ज सभी पर्यावरण मामलों का स्वतंत्र “स्पेशल ऑडिट” कराया जाए।
जांच की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।
बिना अनुमति कार्यों को मंजूरी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
सभी मामलों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो।
पर्यावरण अपराधों पर जीरो‑टॉलरेंस नीति अपनाई जाए। अगर मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो वे अदालत और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) का दरवाजा खटखटायेंगे जाएंगे।
प्रदर्शन में शामिल पर्यावरणविद रोहित सुवर्णा ने कहा, आम आदमी को पेड़ काटने पर चालान मिलता है, लेकिन सिस्टम के भीतर बैठकर पर्यावरण को उजाड़ने वालों पर किसे दंडित करना है, यही सवाल रह गया है।” यह केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि शहर के लिए एक अलार्म है — प्रशासन की उदासीनता ने पर्यावरणीय नियमों को ढार में बदल दिया है।
पर्यावरणविद हर्षद ढगे ने तीखा कटाक्ष करते हुए जोड़ा, “काग़ज़ों में ‘पर्यावरण संरक्षण’ तो है, पर धरातल पर संरक्षण किसका—पेड़ों का या अफसरों का?”फैसला स्पष्ट है: “निष्पक्ष जांच और जवाबदेही नहीं मिली तो अगला पड़ाव अदालत ही होगा” — और इस बार आवाज़ अदालत के दरवाज़े से गुज़रकर सीधे सार्वजनिक रिकॉर्ड में दर्ज होगी।


