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गीत

बडा़ कठिन है जीना जग में,

ठोकर लडता हर पग पग में।

.बडा़ कठिन है ******

 

टूट चुके सब रिश्ते नाते,

होगी कैसे प्रेम की बाते ।

बितेगा दिन किसके संग में

बडा़ कठिन है******

 

आशा और निराशा देखा,

रक्त का सबको प्यासा देखा।

बहता पानी सबके रग में

बडा़ कठिन है******

 

मानवता भी चीख रही है,

देने को कुछ भीख नहीं है।

पाप भरा है अंग अंग में

बडा़ कठिन है*****

 

गीतकार:रसियाकुमार

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