जौनपुर (सं.भा.)। कथा वाचक विनोद कुमार शुक्ल ने कहा कि धरती पर जब अत्याचार बढ़ जाता है, असुर पाप कर्मों से गो, विप्र, धरती को सताते हैं तो धरती का भार हरने के लिए प्रभु स्वत: अवतार लेते हैं। उक्त बातें वह क्षेत्र के दाउदपुर गांव में चल रही श्रीमछ्वागवत कथा में पांचवें दिन शनिवार को श्रोताओं को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, अभिमानी असुर अनीति पर चलकर लोगों को सताते हैं तो धर्म की रक्षा एवं असुरों के उद्धार के लिए प्रभु अवतार लेते हैं। कंस के लिए भगवान कृष्ण तो रावण के लिए प्रभु राम ने अवतार लिया था। जब वासुदेव ने परमात्मा को गोद में लिया तो भव बंधन रूपी समस्त बेड़ियां स्वत: खुल गई और जब माया रूपी कन्या को लिया तो पुन: बेड़ी व हथकड़ी लग गई। इसका मतलब है कि परमात्मा की शरण मे रहोगे तो संसार सागर से पार हो जाओगे और माया के चक्कर में रहे तो भव बंधन में फंसे रहोगे। श्री महराज ने कहा कि भक्ति पथ पर चलने के लिए ज्ञानी होना जरूरी नहीं है। अगर जरूरी है तो प्रभु के चरणों में अनुराग की। उन्होंने कहा कि जिस पर प्रभु की अति कृपा होती है वही सत्संग की राह पर चलता है।
धरती को पाप मुक्त करने को हुआ प्रभु का अवतार
RELATED ARTICLES


