सुलतानपुर (सं. भा.) : फरवरी में ही 300 से अधिक तालाबों को नहर के जरिए साल भर जलयुक्त रखने की बनी कार्ययोजना ठंडे बस्ते में चली गई है। सैकड़ों तालाबों में धूल उड़ रही है। जिले के चारो खंडों की नहरों में पूर्व निर्धारित रोस्टर के मुताबिक पानी की आपूर्ति बीती 11 अप्रैल से बंद कर दिया गया है। तालाबों को भरने के प्रति सिचाई विभाग बेफिक्र बना है।
गर्मी में भूगर्भ जल स्तर नीचे न गिरने पाए, पशु-पंक्षियों को पानी मुहैया हो यह सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न गांवों के चिहित तालाबों में नहर से पानी भरा जाना है। तात्कालिक आवश्यकता और तालाब में पानी की स्थिति व उपलब्धता के आधार पर सिचाई विभाग को यह निर्णय लेना है। मार्च के अंत और अप्रैल की शुरूआत में ही अधिकतर तालाब सूख गए। मई माह में तकरीबन सभी तालाब जल रहित हो जाते हैं। सिचाई विभाग ने खरीफ की फसल के लिए जून के अंत में पानी की आपूर्ति शुरू करने की तैयारी की है। ऐसे में सूख रहे तालाबों को पानी से लबालब होने पर संशय बना है।
फसलों में हो रहे अग्निकांडों से जूझाने और इन्हें नियंत्रित करने करने में नहरों का सूखा रहना अड़चन बन रहा है। बीते दिनों दूबेपुर विकास खंड में नहर के किनारे कई हेक्टेयर गेंहू की फसल जल कर राख हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नहर में पानी होता तो सामूहिक प्रयास से आग नियंत्रित कर ली जाती। चराई पर निकाले गए पशुओं को भी नहर बंद होने से पीने को पानी नहीं मिल पाता।
चिहित किए गए तालाबों को भरने के लिए संबंधित नहर में पानी की आपूर्ति कुछ समय के लिए रोस्टर से इतर की जाएगी। तालाबों को ससमय भर दिया जाएगा।
पंकज गौतम- अधिशाषी अभियंता, सिचाई


