मुंबई(स भा): मुंबई के पश्चिम उपनगरों में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों का खेल एक बार फिर जोर पकड़ रहा है। पहले मालाड क्षेत्र की कलेक्टर जमीनें बेची गईं, अब चारकोप विधानसभा में उसी पैटर्न पर नई झोपड़पट्टियों की नींव रखी जा रही है।

ओमप्रकाश कुमावत (उर्फ ओमजी कुमावत)

शकील मनिहार
मालाड के राठौड़ी, खारोडी, चीकूवाड़ी, धरावली गांव, आज़मी नगर और अंबुजवाड़ी जैसे इलाकों में पहले ही हजारों वर्गमीटर सरकारी जमीनों पर अवैध झोपड़पट्टियाँ खड़ी की जा चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब यही माफिया गिरोह चारकोप विधानसभा के क्षेत्रों में भी सक्रिय हो गया है और सरकारी जमीनों पर भरनी करते हुए मैंग्रोव्स (लघु जंगली झाड़ियां और दलदली वनस्पति) को काटकर नष्ट कर नई झोपड़पट्टी बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

सूत्रों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क भू-माफिया ओमप्रकाश कुमावत (उर्फ ओमजी कुमावत) और शकील मनिहार
के इशारे पर काम कर रहा है। बताया जा रहा है कि इन लोगों ने पहले मालाड इलाके की दर्जनों एकड़ कलेक्टर जमीनें बेची थीं और अब चारकोप में भी सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल शुरू कर दिया है।
चारकोप विधानसभा के अंतर्गत आने वाले मरीना बिल्डिंग के पीछे बड़े पैमाने पर मिट्टी भरनी कर झोपड़ियाँ, गोदाम और अस्थायी निर्माण किए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि ये सारे निर्माण खुलेआम हो रहे हैं — लेकिन न तो कलेक्टर ऑफिस हरकत में है, न ही बीएमसी या पुलिस प्रशासन।

वहीं मालाड विधानसभा के स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मालवणी पुलिस स्टेशन में ओमप्रकाश कुमावत (उर्फ ओमजी कुमावत) के खिलाफ जमीनों से जुड़े एवं अन्य कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके बावजूद उनका नेटवर्क लगातार सक्रिय बना हुआ है।
इस पूरे मामले को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल चारकोप के विधायक योगेश सागर को लेकर उठ रहा है। क्योंकि विधानसभा सत्र के दौरान उन्होंने विधान भवन में अवैध निर्माणों और भूमाफियाओं के खिलाफ आवाज़ उठाई थी, लेकिन अब उनके ही विधानसभा क्षेत्र में यह खेल खुलेआम चल रहा है। सवाल यह है —
क्या विधायक योगेश सागर को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर चुप्पी साध ली गई है?
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यह सिर्फ झोपड़पट्टी बसाने का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा जमीन कारोबार रैकेट सक्रिय है, जिसमें राजनीतिक संरक्षण से लेकर प्रशासनिक मिलीभगत तक सब शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, मरीना बिल्डिंग के पीछे बसने वाली झोपड़पट्टी को बसाने का ठेका कुछ स्थानीय तथाकथित समाजसेवकों ने ले रखा है, जो ओम प्रकाश कुमावत (उर्फ ओम .जी कुमावत )से जमीनें खरीदकर रिक्शा चालकों और छोटे कामगारों को बेच रहे हैं। गरीबों को “ लीगल जमीन ” बताकर ठगा जा रहा है और नकद सौदे के नाम पर लाखों रुपये ऐंठे जा रहे हैं।
यदि प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में चारकोप विधानसभा के कई हिस्सों में सरकारी जमीनों पर नई झोपड़पट्टियाँ बस जाएँगी — और एक बार फिर अरबों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति निजी हाथों में चली जाएगी।
वहीं इस विषय पर जानकारी लेने के लिए जब हमारे संवाददाता ने विधायक योगेश सागर से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।


