लखनऊ (सं.भा.) उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सरकारी और निजी अस्पतालों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि किसी भी मरीज के अस्पताल पहुंचते ही उसकी जान बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उपचार शुरू करने में कागजी औपचारिकताएं बाधा नहीं बननी चाहिए। मरीज के जीवन के शुरुआती दो से पांच मिनट सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं और इसी दौरान लिया गया सही निर्णय उसकी जिंदगी बचा सकता है।
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज और मानवता के प्रति सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने नवस्नातक डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग संवेदनशीलता तथा सेवा भाव के साथ करें, ताकि हर मरीज को समय पर और बेहतर इलाज मिल सके।
ब्रजेश पाठक ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार निवेश कर रही है। मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में आधुनिक उपकरण, बेहतर आधारभूत सुविधाएं और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि केजीएमयू ने देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में अपनी अलग पहचान बनाई है और यह उपलब्धि यहां के चिकित्सकों, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के समर्पण का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करना है, जहां मरीज को बिना किसी देरी के गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो और चिकित्सा शिक्षा भी वैश्विक मानकों के अनुरूप हो। इसी उद्देश्य से प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों को लगातार मजबूत किया जा रहा है, ताकि उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी स्थिति और सुदृढ़ कर सके।


